Home टेक्नोलॉजी इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IOT) क्या है और ये कैसे कम करता है|

इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IOT) क्या है और ये कैसे कम करता है|

दोस्तों आपने  इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IOT) का नाम शायद  सुना होगा और उसके बारे में कुछ जानते भी होंगे आज हम आपको बताने जा रहे है इसकी पूरी जानकारी के IOT क्या होता है और ये कैसे काम करता है|इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स को हम  IOT के नाम से भी जाना जाता है, IOT (इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स) एक्चुअली में वो devices है जो इन्टरनेट से कनेक्टेड है IOT कहलाता है| इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स सेंसर, सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कनेक्टिविटी का एक सिस्टम है जो इसे दुसरे कनेक्टेड devices के साथ इनफार्मेशन एक्सचेंज करने की परमिशन देता है|

इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स
इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स

सिंपल टर्म में हम ये कह सकते है के इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स एक नेटवर्क है जिसमे फिजिकल ऑब्जेक्ट्स डेटा का एक्सचेंज internally या दुसरे डिवाइस के साथ कर सकता है| इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स एक विज़न है जिसे आज 2020 तक के लिए एक बड़े पैमाने पे एक्सपेंशन की उम्मीद के साथ बनाया जा रहा है| असल में presently  1.9 बिलियन devices आलरेडी कनेक्ट हो गये है और उम्मीद है के 2018 के आखिर तक 9 बिलियन devices कनेक्ट हो जायेंगे|

IOT एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी नंबर ऑफ़ ऑब्जेक्ट्स हर शेप और साइज़ का कन्टेन करता है जिसमे स्मार्ट माइक्रोवेव ओवन जो खुद ही खाना को राईट समय तक पका देता है से लेकर स्मार्ट सेल्फ ड्राइविंग कार जिसके complex सेंसर अपने रस्ते में आने वाली चीजों को डिटेक्ट करते है| यहा तक के कुछ पहने जाने वाले डिवाइस है जो आपके हार्ट बीट रेट को measure करती है और आपके स्टेप्स को भी काउंट करती है|

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इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स कैसे काम करता है

इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स IPV4 का यूज़ करता है| डेली यूज़ में यूज़ किये जाने वाली चीजें जैसे टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन वघैरह को एक दुसरे से कनेक्ट करता है| डिवाइस और ऑब्जेक्ट बिल्ट इन सेंसर के साथ इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स प्लेटफोर्म से कनेक्टेड होते है,जो डेटा को डिफरेंट डिवाइस से integrate करता है  और analytics के यूज़ से ये वैल्युएबल इनफार्मेशन को एप्लीकेशन जो के स्पेसिफिक नीड के लिए बनाया गया है उसके साथ शेयर करता  है|

ये IOT प्लेटफोर्म  exactly डिटेक्ट कर लेते है के कौन सा इनफार्मेशन useful है और कौन सा safely इग्नोर किया जा सकता है| ये इनफार्मेशन पैटर्न डिटेक्ट करने के लिए, recommend करने और वक़्त से पहले प्रॉब्लम डिटेक्ट कर लेने के लिए यूज़ किये जाते है|

इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स आपके घर में

suppose लीजए के आप डेली मोर्निंग में 7 am में ऑफिस जाने के लिए उठते है और आपका अलार्म आपको उठाने का काम करता है और आप अपने सही वक़्त पे ऑफिस पहुँच जाते है|लेकिन suppose किजए के किसी रीज़न से आपकी ट्रेन कैंसिल हो जाती है और आपको ड्राइव कर के जाना है और ड्राइव कर के जाने में ये दिक्कत है के ये ज्यादा टाइम लेता है, और आपको  लेट होने से बचने के लिए  6:45 am में उठाना चाहए था|और अगर बारिश का मौसम है तो आपको ऑफिस जाने में और भी ज्यादा टाइम लग जायेगा क्यूँ की  बारिश की वजह से आप स्लो ड्राइव करेंगे|यहा पे एक IOT इनेबल्ड अलार्म क्लॉक का काम ये है के वो इन सारी चीजों के हिसाब से खुद को रिसेट कर लेगा  और आपको खुद से उस टाइम में उठाएगा ताकि आप टाइम पे ऑफिस पहुँच जाए|

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इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स के लिए एप्लीकेशन

स्मार्ट home: स्मार्ट home iot की बहुत popular application है अमेजन इको से लेकर नेस्ट थर्मोस्टेट तक ऐसे हजारो एप्लीकेशन है जिसे लोग अपनी आवाज़ से कंट्रोल करते है|

वियरेबल्स: जैसा के आप जानते होंगे के वाच अब सिर्फ हमें टाइम शो करने के लिए ही नहीं है ये टाइम बताने के साथ साथ और भी बहुत से काम करता है जैसे के phone कॉल्स करना  मेसेज भेजना और भी बहुत सरे काम जिसे एप्पल और दूसरी कोम्पन्यों के द्वारा बनाया गया है| फिटनेस के फिल्ड में भी IOT ने फिटबिट और जॉबोन जैसे डिवाइसेज की मदद से काफी तबदीली ले कर आया है|

स्मार्ट सिटीज : IOT की मदद से हम कई प्रोब्लेम्स जैसे के क्राइम pollution, ट्राफिक से आसानी से निबट सकते है|

कनेक्टेड कार : इन कार्स में इन्टरनेट एक्सेस होता है और यह एक्सेस दुसरे के साथ शेयर भी किया जा सकता है|

बिजनेस इनसाइडर द्वारा किए गये सर्वे के मुताबिक 2020 तक दुनया में 24 अरब से ज्यादा इन्टरनेट डिवाइस पूरी दुनया में लग जाएगी|इस ग्रोथ को देखते हुआ ये कहा जा सकता है के दुनया में हर इन्सान के पास कम से कम 4 डिवाइस तो होगी ही|

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इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स इंसानों की डिजिटल दुनिया और डेटा की डिजिटल दुनिया के बीच का कनेक्शन है। कंप्यूटर, स्मार्टफोन, स्मार्टवाच, टैबलेट, मार्डन टीवी और पहनने वाले गैजेट्स सभी IOT का हिस्सा है। हालांकि, रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे थर्मोस्टैट्स और स्मोक डिटेक्टर अब स्मार्ट हो रहे हैं, जो उन्हें IOT के रूप में exist करता है।

IOT की भारत में क्या हालात  है?

सेंट्रल गवर्नमेंट ने अक्टूबर 2014 में इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर नीति जारी की थी। डिजिटल इण्डिया स्मार्ट सिटी पहल के साथ  अप्रैल 2015 में  जारी किया गया।

इस  के तहत 2020 तक 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इंटरनेट ऑफ थिंग्स  बनाने की सोच है। इसके अलावा सरकार की तैयारी इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स सेंटर्स को भी डेवलप करने की है। 2020 तक आंध्रप्रदेश को मुख्य आईटी हब में चेंज करने के उद्देश्य से आंध्रप्रदेश की सरकार ने भारत की पहली इंटरनेट ऑफ थिंग्स  2016 को मंजूरी दिया है।

यहां तक कि निजी क्षेत्र में अगस्त 2015 में रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड ने अमेरिका आधारित जैस्पर टेक्नोलॉजीज के साथ एक समझौता कर भारत में इंटरनेट ऑफ थिंग्स सेवाओं में दाखिल करने की कोशिश की।

 

 

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