इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स इंसानों की डिजिटल दुनिया और डेटा की डिजिटल दुनिया के बीच का कनेक्शन है। कंप्यूटर, स्मार्टफोन, स्मार्टवाच, टैबलेट, मार्डन टीवी और पहनने वाले गैजेट्स सभी IOT का हिस्सा है। हालांकि, रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें जैसे थर्मोस्टैट्स और स्मोक डिटेक्टर अब स्मार्ट हो रहे हैं, जो उन्हें IOT के रूप में exist करता है।

IOT की भारत में क्या हालात  है?

सेंट्रल गवर्नमेंट ने अक्टूबर 2014 में इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर नीति जारी की थी। डिजिटल इण्डिया स्मार्ट सिटी पहल के साथ  अप्रैल 2015 में  जारी किया गया।

इस  के तहत 2020 तक 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इंटरनेट ऑफ थिंग्स  बनाने की सोच है। इसके अलावा सरकार की तैयारी इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स सेंटर्स को भी डेवलप करने की है। 2020 तक आंध्रप्रदेश को मुख्य आईटी हब में चेंज करने के उद्देश्य से आंध्रप्रदेश की सरकार ने भारत की पहली इंटरनेट ऑफ थिंग्स  2016 को मंजूरी दिया है।

यहां तक कि निजी क्षेत्र में अगस्त 2015 में रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड ने अमेरिका आधारित जैस्पर टेक्नोलॉजीज के साथ एक समझौता कर भारत में इंटरनेट ऑफ थिंग्स सेवाओं में दाखिल करने की कोशिश की।